प्रभु बस तेरी ही आस है,
तू ही तो मेरी प्यास है।
तुझ बिन चलती न सांस है।
तेरी ही छत्रछाया का आकाश है।
तुझसे ही तो सृष्टि ये आगाज है।
तुम बिन बढ़ते नहीं कदम,
तुम बिन होते नहीं करम,
तुम बिन न दिन है न रात है।
तुम बिन न कल है न आज है।
तुमसे ही तो पल-छिन की आस है।
आँखों में न नींद है न ख्वाब का अंदाज़ है।
तुमसे मिलने को ये दिल बेकरार है।
सर्वस्व है तेरा, तेरा तुझको अर्पित,
कुछ मेरा है ही नहीं, मैं हूँ तुझे समर्पित।
तुम बिन तनहा कटते दिन हैं।
तुम बिन अधूरी लगती हैं रातें,
तुम बिन जीवन नहीं है संभव,
तुम बिन न सुबह होती है न शाम,
तुम बिन रहती हरदम गुमसुम
अंतर बाहर बस तुम पर ही है विश्वास।
प्रभु तुझ बिन झूठा है संसार।

रचयिता – सुषमा श्रीवास्तव, मौलिक कृति,रुद्रपुर, उत्तराखंड।

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