अब तो में और बस मेरा परिवार
यही हो गया सुख का आधार
बड़े बड़े बंगलों में
आज दिल हो गए छोटे
अपने आप में सब रहते व्यस्त
किसी को किसी की नही खबर
बच्चे व्यस्त पढ़ाई में
क्या पढ़ रहे ,नही किसी को खबर
माता पिता दोनो जॉब पर
समय किसी के पास नही
पहले संयुक्त परिवार में
रहकर सीखता था बच्चा
आदर सम्मान सामंजस्य करना
मिलजुल कर बांट कर खाना
किंतु अब बस मैं ही मैं
दूसरा कुछ भी नही
माता पिता भी देखते थे
बेटी के लिए ऐसा परिवार
जहां बेटी न रहे अकेली
भरा पूरा हो परिवार
किंतु समय अब बदल गया
और साथ समय केसोच भी
अब चाहिए बस इतना
जहां सिर्फ हों सास ससुर
इकलौता हो घर का चिराग
दूजा और कोई न हो
फिर क्या सीखेगी बेटी भी
परिवार में निर्वाह करना।
बस दो लोगो में ही
अब सिमट गया परिवार।
