वो नृत्य को कई आयाम दे गए
इक के स्वप्न के लिये सुबहो शाम दे गए🙏
नृत्य के आनन्द में खोते चले गए
अनमोल इक चीज़ को वो बेदाम दे गए🙏
नृत्य ही तपस्या नृत्य ही योग हो गया
नृत्य की इस विधा वो कथक नाम दे गए🙏
इन्कार कर दिया उस नवाबी शान को
जो चाहा दिल ने उसे वो अंजाम दे गए🙏
शिव के एक स्वरूप को प्रसन्न कर गए
कितने दिए कृष्ण वो कितने राम दे गए🙏
विश्व में गूँज रही उनके पैरों की उदघोष
घुँघरुओं की आवाज में कोहराम दे गए🙏
रचनाकार – अवनेश कुमार गोस्वामी
