कितनी खुशी मिलती है  निस्वार्थ सेवा से, 
     बिना कुछ लिए, 
उसके आंसुओं को रोकने से, 
दो वक़्त की रोटी देने से ,उनको गले लगाने से, 
     कितनी खुशी मिलती है, 
किसी असहाय के सर पर हाथ फेरने से, 
किसी की चोट पर मरहम लगाने से, 
किसी की धुप को हटा कर उसे छांव देने से, 
    कितनी खुशी मिलती है, 
कितनी खुशी मिलती है निस्वार्थ सेवा से, 
किसी बेबस को सहारा देने से, 
अपना सुख छोड़ के उनका दुख अपनाने से, 
आसुओं वाले आखों मे से आसूं पोछने से, 
कितनी खुशी मिलती है, 
सच्चा सुख मिलता है निस्वार्थ सेवा से । 
असहाय मनुष्य कि सेवा करना ही ईश्वर की सच्ची भक्ति है।।
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