ना करो तुम नफरत , जय हिंद जी आज़ाद से।
बोलो तुम भी जय हिंद, जी आज़ाद जुबान से।।
जय हिंद जी आजाद , जय हिंद जी आजाद ।
ना करो तुम नफरत——————————-।।
जन्म लिया है तुमने, जिसकी माटी में।
ले रहे हो सांस तुम , जिसकी माटी में।।
मानो तुम अहसान उसका, सच्चे ईमान से ।
बोलो तुम जय हिंद, जी आज़ाद जुबान से।।
जय हिंद जी आज़ाद, जय हिंद जी आज़ाद।
ना करो तुम नफरत—————————-।।
जिससे है पहचान तुम्हारी, इस सारे संसार में।
जिसकी वजह से मिलती है इज्ज़त, तुमको संसार में।।
तुलना में वह है बराबर, तुम्हारे भगवान से ।
बोलो तुम जय हिंद, जी आजाद जुबान से।।
जय हिंद जी आजाद , जय हिंद जी आजाद ।
ना करो तुम नफरत——————————।।
मानो खुद को खुशकिस्मत, तुमको ऐसा देश मिला।
निःस्वार्थ जिससे तुमको ,ढेर सारा प्यार मिला।।
करो इबादत पूजा इसकी तुम, दिलो-जान से।
बोलो तुम जय हिंद , जी आजाद जुबान से।।
जय हिंद जी आजाद , जय हिंद जी आजाद।
ना करो तुम नफरत——————————-।।
रचनाकार एवं लेखक- 
गुरुदीन वर्मा उर्फ जी.आज़ाद
तहसील एवं जिला- बारां(राजस्थान)
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