एक छोटी सी प्रस्तुति आज के दिवस पर:-
कोई एक दिवस थोड़ी होता है नारी का जानते है हम
अब मिल ही रहा ये दिन तो चलो इसे उत्सव सा मनाते हम।
सब कहते है कि औरत का अपना कोई घर नही होता
हम कहते है औरत के बिना कोई घर ,घर ही नही होता।।
ईंट-पत्थर जोड़ के मकान तो मिस्त्री द्वारा बनाया जाता है
लेकिन उस मकान को घर केवल स्त्री द्वार ही बनाया जाता हैं।।
एक औरत सबसे सफल जानते हो कैसे बनती है
जिसका हाथ मजबूती से दूसरी औरत थाम के रखती है।।
नर हो या नारी नही होता है कोई किसी पे भी भारी
एक दूजे के पूरक है वे,दोनो का ही जीवन होता है एक दूजे का आभारी।।
जननी,शक्ति,संपत्ति,सम्रद्धि और लक्ष्मी सबमें ही तो नारी है
फिर क्यों उसको समझें अबला और कहें ये तो बेचारी है।।
ना वस्तु समझो, न देवी की ही तरह सिर्फ पूजो उसे
कदम से कदम चलने का साहस और सुरक्षित खुला जहां दो उसे।
दे सको तो वो नज़रिया दो उसे जहां वो खुल के सांस ले सके
खुद को कभी कमतर न समझे , ये दुनिया उसे सिर्फ खूबसूरत लगे।।
एकता श्रीवास्तव, इंदौर✍️
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