धरती का स्वर्ग मुझे सब कहते है।
हरी-भरी वादियां,बर्फीले पहाड़ ,
डल झील की खूबसूरती ,
कभी मेरी पहचान हुआ करती थी,,,,,
बड़ी खूबसूरती से लोग,
मेरा बखान अपने शब्दों में किया करते थे।।
मैं भी अपने भाग्य पर इठलाता था,,,
खूबसूरत शहर के नाम से ,
जब मुझे नवाजा जाता था।।
,
चारो तरफ चैनो अमन का बसेरा था ,,,
नया नबेला जोडा अपनी
जिंदगी की शुरुआत मेरी
हरी- भरी वादियों में किया करता था,
मेरी खूबसूरती को एक दूजे के साथ,
मिल कर जिया करता था।।
न जाने किसकी नजर लग गयी मुझको,
जो लोग कल तक शांति, अमन ,
प्रेम- सौहार्द की बात करते थे
आज वही एक दूसरे के खून के प्यासे है।।
हरी-भरी मेरी वादियां पर
आज खौफ का साया है,,
चारो तरफ बस खून ही-खून
देख मेरा दिल दहलाया है।।
न जाने मैं क्या से क्या होगा,,,
जहा कल तक बच्चों को हँसी गूँजती थी
आज वहां चीख पुकार सुनाई देती है,,,
धरती का स्वर्ग आज भाय-भाय सा करता है।।
किससे मैं अपनी व्यथा कहुँ यारो ,
जब मेरे अपनो ने ही
मुझपर खंजर चलाया हो,।।
