कहते हैं बिना अपने मरे स्वर्ग भी नसीब नहीं होता,तो फिर धरती का स्वर्ग ही ढूंढने का प्रयास करते हैं। चलो फिर – आइए पहले आध्यात्मिक नज़रिए से देखते हैं तो यह कहना मुनासिब होगा कि हम जीवन में जो कर्म रूपी बीज बोते हैं वही प्रारब्ध बन हमारे भोग्यमान होते हैं। यदि वे सत्कर्म के परिणामी हैं तो वही हमारे लिए ‘धरती का स्वर्ग’ है,और यदि दुष्कर्म के परिणामी हैं तो वही ‘धरती का नर्क’ है।
अब आइए दुनायावी लौकिक जगत में तो पश्चिमी देशों का धरती का स्वर्ग ‘स्विट्जरलैंड’ कहा जाता है अपने वैभव और प्राकृतिक सौंदर्य के कारण तो वहीं हमारी धरा पर एक नहीं कई-कई ऐसे स्थान हैं जो अपने अप्रतिम सौंदर्य और प्राकृतिकता के कारण इस धरती के स्वर्ग सम्बोधन से अलंकृत होते हैं। जैसे कि उत्तराखंड का केदारनाथ, औली, तो सिक्किम का ‘कटाओ’,यूमथांग और सबसे बढ़कर हमारे भारतवर्ष का भाल ‘कश्मीर’ अगर मेरे कथन पर भरोसा न हो तो अवश्य एक-एक बार उक्त स्वर्गिक स्थानों का परिभ्रमण करके आइए तब आप भी कहने लगेंगे। अरे जा न भी पाएं तो साहित्य की चादर पर ही इन स्थानों का भावविभोर कर देने वाले चित्रण के प्यालों का रसास्वादन अपने पिपासु चक्षुओं से एक बार करके तो देखें, आप अंतस् से मस्तिष्क तक मंत्रमुग्ध न हो जाएं कहिएगा।
जम्मू-कश्मीर की खूबसूरती के किस्से भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में मशहूर हैं। शायद इसी वजह से लोग इसे धरती का स्वर्ग कहते हैं। आइए आपको जम्मू कश्मीर की उन खास जगहों के बारे में बताते हैं जिन्हें देखने हर साल यहाँ पर्यटकों की भीड़ लगी रहती है।
यहाँ के एक नहीं अपितु दस स्थल इसकी खूबसूरती का बखान करते हैं –:
• डल झील -: कश्मीर की डल झील इस समय और ज्यादा खूबसूरत दिख रही है। ये झील कश्मीर आने वाले पर्यटकों के लिए आकर्षण का बड़ा केंद्र है। लेक में बर्फ जमने से शिकारा चलाने वालों को काफी दिक्कत होती है।
• सोनमर्ग -: समुद्र सतह से 2740 मीटर की ऊंचाई पर स्थित सोनमर्ग जम्मू और कश्मीर राज्य में स्थित एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल है। बर्फ से आच्छादित पहाड़ों से घिरा हुआ सोनमर्ग शहर जोजी-ला दर्रे के पहले स्थित है। सोनमर्ग का शाब्दिक अर्थ है “सोने के मैदान”।
• जम्मू -: जम्मू शहर जम्मू कश्मीर राज्य की शीतकालीन राजधानी है। इस शहर को मंदिरों के शहर नाम से भी जाना जाता है। जम्मू शहर में एक बढ़कर एक प्रसिद्ध मंदिर हैं। इस शहर की स्थापना 8 वीं सदी में राजा लोचन ने की थी। जम्मू में और जम्मू से जुड़े हुए विश्वप्रसिद्ध तीर्थ स्थल में वैष्णों देवी धाम, बहु फोर्ट, अमर महल शामिल हैं। जम्मू में डोगरा राजवंश के महल और संग्रहालय देखने लायक है।
• कारगिल -: कारगिल में 1999 में भारत और पाकिस्तान के बीच लड़ाई हुई थी। वैसे यह स्थान मुख्य से बौद्ध पर्यटन केंद्र के रुप में प्रसिद्ध है। यहां बौद्धों के कई प्रसिद्ध मठ स्थित है। मठों के अतिरिक्त यहां कई अन्य चीजें भी घूमने लायक है।
• बेताब घाटी -: मन-मस्तिष्क को जो गहराई तक शांत करे, ऐसी खूबसूरत जगहें धरती पर हर जगह देखने को नहीं मिलेंगी, और यह हमारा सौभाग्य है कि जम्मू-कश्मीर जैसा जन्नतनुमा स्थल भारत का हिस्सा है। मनमोहक वातावरण के साथ यहां की पहाड़ी घाटियां, वनस्पति व झीलें आत्मा को तृप्त करने का काम करती हैं।
• नागिन झील -: नागिन झील जम्मू और कश्मीर के श्रीनगर शहर की डल झील से लगभग 6 कि.मी. की दूरी पर स्थित है। यह झील आसपास के क्षेत्र में ‘ज्वैल इन द रिंग’ के नाम से काफ़ी विख्यात है, जो चारों तरफ से पेड़ों से घिरी हुई है। यहाँ पूरे साल पर्यटकों का तांता लगा रहता है।
• पहलगाम -: पहलगाम कश्मीर के सबसे खूबसूरत हिल स्टेशनों में एक है। समुद्र तल से 2130 मीटर की ऊँचाई पर स्थित पहलगाम लिद्दर नदी और शेषनाग झील के मुहाने पर बसा है। मुगलों के शासनकाल के दौरान, ये केवल चरवाहों का गाँव था। हिंदू धर्म के प्रमुख तीर्थ स्थल अमरनाथ यात्रा पर जाने के लिए पहलगाम पहला पड़ाव है।
• श्रीनगर -: जम्मू कश्मीर की ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर है। श्रीनगर मुगल काल से ही गर्मी के लिहाज से सबसे अच्छी जगह मानी जाती रही है। जिसके चलते कई मुगल बादशाहों ने इस श्रीनगर में कई बागों का निर्माण करवाया। इन बागों में सबसे प्रसिद्ध है निशात बाग।
• द्रास -: द्रास को लद्दाख का गेटवे माना जाता है। यह भारत के सबसे ठंडे शहरों में से एक है। कई स्रोतों के अनुसार साइबेरिया के बाद यह दुनिया का दूसरा सबसे सर्द मानवीय सुबह मानी जाती है। कारगिल युद्ध के बाद इस स्थान का अपना ही महत्व है।
• जांस्कर -: जांस्कर लद्दाख के सब-जिले करगिल का एक सूदूर स्थान है। सर्दियों यह जगह भारत के अन्य भागों से बिलकुल कट जाता है। सर्दियों में जास्कर जाने का एक मात्र रास्ता जमी हुई नदी पर पैदल चलकर पार करना होता है। एडवेंचर के लिए अच्छी जगह मानी जाती है। इस कस्बे कुल आबादी 700 के आसपास है।
ओ मेरे सुहृद सुधी पाठको मुझसे जितना हो सका मैंने परोस दिया आपके “धरती के स्वर्ग” नामक थाली में, अब आपको जो रुचिकर लगे उसका उपभोग कर अपनी क्षुधापूर्ति कर आनन्दोत्सव मनाइए। मैं तो चली।
लेखिका –
सुषमा श्रीवास्तव
उत्तराखंड।
