ए मेरे देशके युवाओ तुम अग्निवीर का सम्मान करो।
जिस देश में जन्म लिया उस जन्मभूमि का मान करो।।
तुम्है सैना मे जाने को कैसा अवसर दिया है इस सरकार ने।
तुम्है कुछ कर दिखलाने का अवसर दिया है इस सरकार ने।।
ए मेरे देश के युवाओ ऐसा अवसर तुम मत चूको।
आतंकियौ के बहकावे में आकर देश की सम्पत्ति मत फूको।।
तुमको यह सब किसने सिखलाया कि अपना देश जलाना है।
देश को अन्धेरे मे धकेलकर इन आतंकियौ का मन बहलाना है।।
हम सब को क्या होगा हासिल अपना ही देश जलाने से।
हम सब पीछे रह जायेगे इन सब के बहकाने में आने से।।
अगर इस तरह तुम ही द्रग- भ्रमित होकर रह जाओगे।
तो इस अपनी जन्मभूमि का जो कर्जा है कैसे अदा करपाओगे।।
तुम संस्कार हीन क्यो हुए अपने पथ से बिचलित होते जाते हो।
तुम्है मिले जो संस्कार बचपन में उनसे अलग थलग होते जाते हो।।
अब भी है समय तुम छोडो़ यह रस्ता अच्छे रस्ते पर आजाओ।
सब तरफ से मिलेगी माँफी तुम्है अपना भाग्य जगा जाओ।।
मंजिल उनको ही मिलती है जिनके सपनों में जान होती है।
पंख दिखाने के होते है केवल हौसलौ में ही उडा़न होती है।।
रचनाकार:- नरेश शर्मा ” पचौरी “
