सबसे अलग, सबसे जुदा, तेरी मेरी प्रेम कहानी है…
दिल में रखते हैं प्यार बहुत, पर आंखों में रहता पानी है।
तुम्हें खोने से हमेशा डरती रही हूं मैं
झगड़ा चाहे लाख किया, मगर प्यार हमेशा करती रही हूं मैं
कैसे कहूं? मैं कल भी तुम्हारी थी और आज भी हूं
यह बात तुम्हें बतलानी है…
दिल में रखते प्यार बहुत, पर आंखों में रहता पानी है।
सुनो! आज भी तुम्हें देखने को बहुत तरसती हूं मैं
कैसे बताऊं?
तुम्हारी आवाज सुनने को कितना तड़पती हूं मैं
निकल पड़ी हूं तुम्हारे बगैर एक नयी राह खोजने
यह राह बड़ी अंजानी है…
दिल में रखते हैं प्यार बहुत, पर आंखों में रहता पानी है।
जुदा हो गए हैं लेकिन हमारा रिश्ता कभी न टूटेगा
रूह से रूह तक सफर तय किया है हमने,
अलग होकर भी यह साथ कभी न छूटेगा
जानती हूं, जिस्मानी मोहब्बत की दुनिया है यह
फिर भी इश्क हमारा रुहानी है…
दिल में रखते हैं प्यार बहुत, पर आंखों में रहता पानी है।
अपने परिवार की खुशियों के लिए
हमने अपने प्यार को छोड़ दिया
जिसको मांगा था मैंने अपनी दुआओं में
आज उसका ही दिल बड़ी बेरहमी से मैंने तोड़ दिया
बेवफाई नहीं की मैंने, बस अपने कर्तव्यों के लिए
हमारे प्यार की दे दी कुर्बानी है…
दिल में रखते हैं प्यार बहुत, पर आंखों में रहता पानी है।
जानती थी, मेरे होते हुए तुम किसी और के हो न पाओगे
इसलिए नफरत भर दी दिल में तुम्हारे अपने लिए
मगर सच तो यह है, तुम ताउम्र मुझे याद आओगे
यह दर्द , यह तड़प और तकलीफ ही तो
हमारे प्यार की निशानी है…
दिल में रखते हैं प्यार बहुत, पर आंखों में रहता पानी है।
मैंने जुदाई की राह चुनी अपने प्यार को ठुकराकर
बेटी होने का फर्ज निभाया है
तुमने चुन लिया एक जीवनसाथी अपने मां बाप की खुशी के लिए
कोई शिकायत नहीं, तुमने भी तो बेटे का धर्म अपनाया है।
अब जुदा होकर ही हमें अपनी प्रीति निभानी है…
दिल में रखते हैं प्यार बहुत, पर आंखों में रहता पानी है।
मिले तो लैला और मजनू भी नहीं
चलो मान लिया वो इंसान थे
मगर मिले तो राधा और कृष्ण भी नहीं
वो तो भगवान थे
तो फिर क्या हुआ अगर हम भी नहीं मिले
समझ लो कि हमें भी यही रीति आगे बढ़ानी है…
दिल में रखते हैं प्यार बहुत, पर आंखों में रहता पानी है।
सबसे अलग, सबसे जुदा, तेरी मेरी प्रेम कहानी है…
दिल में रखते हैं प्यार बहुत, पर आंखों में रहता पानी है।
दिल में रखते हैं प्यार बहुत, पर आंखों में रहता पानी है।
लेखिका :- रचना राठौर ✍️
