तेरी मेरी कहानी(चाय और मैं)
मिले थे जब हम वो शाम थी तुफानी,
चल रही थी मौसम की मनमानी,
हवाओं में तेरी ही खुशबू थी वो जिस्मानी,
देख के लगा जैसे, कई जन्मों से है रूहानी,
अपने अधरों से लगा के, हल्क से उतार के,
तेरी गरमाहट को पा के,
भूल जाऊ अपनी उलझनों भरी जिंदगानी ,
बस यही है चाय और मेरी कहानी,
जैसे सूबह की ओस का हो पानी,
याद रखेंगे सब जुबानी,
तेरी मेरी कहानी l
