तेरी एक छवि को जो देखे
अति मनमोहक- मनभावन
केश खुलें हों तेरे जिस पल
आ जाये जैसे फिर से सावन
तेरी बिंदिया कुछ कर जाती है ❣️
रंग साँवला नैन नशीले
नयन बाण से हृदय वेधन
मोती से बरसे बाल हैं गीले
कैसी तृष्णा कैसा सम्मोहन
तेरी बिंदिया कुछ कर जाती है ❣️
अंग अंग में आग भरी है
संयम तो जल सा जाता है
रूप कमल के दर्शन से
हृदय पुष्प खिल सा जाता है
तेरी बिंदिया कुछ कर जाती है ❣️
आलिंगन की अभिलाषा
रोम-रोम को प्रफुल्लित कर जाती है
प्रेम संकेतों की ये भाषा
तू बनके रति मूरत काम जगाती है
तेरी बिंदिया कुछ कर जाती है ❣️
जीवन का उद्देश्य तू ही
नित्य ही पथ दिखलाती है
निश्छल प्रेम का संदेश तू ही
तू नारी है तू देवी बन जाती है
तेरी बिंदिया कुछ कर जाती है ❣️
रचनाकार – अवनेश कुमार गोस्वामी
