तुम लौटो तो,,सज गया है घर यूँ तो मेरा लाजबाब,
तुम लौटो तो इसमें चहलकदमी लौटे।
हर दीवार का रंग रोगन है लाजबाब,
बस कर रहीं यह इल्तजा आ जाइए आप,
तुम लौटो तो इनमें रोशनी लौटे।
चल रहीं हैं सासें तेरे जाने से बुझी बुझी,
भरी बहार में है जिंदगी लुटी लुटी
तुम लौटो तो इनमें जिन्दगी लौटे।
जला आते हैं हर रोज चौबारे पे दिया तेरे नाम का,
भूल न जाके तू रास्ता कहीं हमदम,
जब घर की गली लौटे।
तेरे ही काँधे पर सिर रखकर बरसेंगे,
खुश्क हो गए हैं आँख के आसूँ इसी जिद में,
तुम लौटो तो पलकों की यह नमी लौटे।
अन्जू दीक्षित,
उत्तर प्रदेश।
