तुम मानो या ना मानो
ये जो हमारा रिश्ता है इस जन्म का नही है
ये रिश्ता है कई जन्मों का
ये प्रेम हमारा साक्षी है,ये प्रेम आज का नही
ये प्रेम है कई जन्मों का
तुम मानो या ना मानो
तुम ही मेरे महिवाल थे
और मै तुम्हारी सोहनी
तुमने मेरी खातीर गायें चराई
और मैं कच्चे घड़े पे तैर आयी थी
तुम मानो या ना मानो
तुम ही मेरे फरहाद थे
और मै ही तुम्हारी शीरी
तुम मेरे लिये अपनी जान पर खेल गये
तो मैने तुम्हारे कदमो मे अपनी जान दे दी
तुम मानो या ना मानो
तुम ही मेरे मजनूँ थे
और मै तुम्हारी लैला
तुमने मेरे लिये लोगों के पत्थर खाये
और मैने भी तुम्हारे लिये अपने प्राण त्यागे
तुम मानो या ना मानो
तुम ही मेरे राँझा थे
और मै तुम्हारी हीर
तुमने मेरे लिये प्राण त्यागे
और मैने भी तुम्हारे लिये विष पिया था
तुम मानो या ना मानो
तुम मानो या ना मानो
कविता गुज्जर
