तलाश रहा हूँ कुछ शब्द,
अपने लिखे काव्य में, 
ताकि आवाज उसको दे सकूँ,
और आरंभ कर सकूँ मैं,
अपनी बात को कहना,
आज की इस सभा में।
देख रहा हूँ उसको,
आज की मजलिस में,
अंतिम पंक्ति में बैठे हुए,
अपनी पलकों को झुकाये,
अपने होठों पे खामोशी लिये।
समझ रहा हूँ मैं,
उसकी मजबूरी को,
उसके मन की पीड़ा को,
उसके मन की कहानी को,
पर्दे के पीछे के राज को।
फिर भी कहना तो है मुझको,
आज की इस महफिल में,
किस नाम से पुकारूँ उसको,
क्या नाम दूँ मैं इस रिश्ते को,
या बन्द कर दूँ अपनी बात को,
या आगे की कहानी लिखूँ ,
और क्या रखूँ उसका शीर्षक,
तलाश रहा हूँ कुछ शब्द।
शिक्षक एवं साहित्यकार- 
गुरुदीन वर्मा उर्फ जी.आज़ाद
तहसील एवं जिला-बारां(राजस्थान)
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