परिवार में दो भाइयों और दो बहनों में सबसे छोटी लता ने इसी वर्ष स्नातक की परीक्षा प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण की थी, पढ़ने में शुरू से मेधावी थी लता, वो अभी और आगे पढ़ना चाहती थी, 
“माँ ! मैं आगे और पढ़ना चाहती हूँ, मुझे Ph.D करना है, मुझे कलेक्टर बनना है”
“देख लाडो, जितना पढ़ना-लिखना था तुझे मायके वो तो अब पूरा हो गया, अब जो भी कुछ करना है वो अपने ससुराल में जाके करना”
“ससुराल क्या बोल रही हो माँ, मुझे अभी कोई शादी-वादी नहीं करनी है, अभी १९ वर्ष की भी नहीं हुई हूँ”
“लाडो तू तो अच्छी खासी बड़ी हो गयी है, इस गांव में तो लडक़ी के १४ साल की होते  ही फेरे डलवा देते हैं, वैसे भी तेरे बाबू जी और तेरे भाई तेरे लिए लड़का ढूंढ़ रहे हैं और तू उन सब को अच्छे से जानती है”
“नहीं माँ एक पढ़ाई के सिवा और क्या माँग रही हूँ मैं”
“देख लाडो, जब से वो रामनरेश की लड़की का दो लड़कों के साथ का वीडियो मोबाइल में आया है, सारे गांव का माहौल बदल गया है, वो भी तो तेरे ही कॉलेज की है, वो दोनों लड़के भी तेरे ही कॉलेज के हैं, इसलिए सारे गाँववालों ने मिलकर फैसला लिया है कि गाँव की कोई भी लड़की अब गांव के बाहर पढ़ने नहीं जायेगी”
“लेकिन माँ किसी एक के गलत करने से हम सबको तो गलत नहीं बोल सकते हैं”
“देख लाडो, अब तू ज्यादा बहस मत कर, अब कुछ भी नहीं होने वाला है”
लता के पिता राजस्थान के धौलपुर जिले के एक छोटे से गांव के बड़े किसान थे, जमीन-जायदाद पुश्तैनी थी, घर में पत्नी की अलावा दो बेटे और दो बेटियाँ थीं, दोनों ही लड़के खेतीबाड़ी का काम देखते हैं , उन्होंने अपनी बड़ी बेटी की २ वर्ष पहले शादी कर दी थी।
घर में शिक्षा का माहौल इतना भर था कि वो लता ही थी जिसने स्नातक उत्तीर्ण किया था।
लता को अपने सपने और भविष्य दोनों ही बिखरते हुए नज़र आने लगे लेकिन उसको अच्छे से पता था कि घर में कोई भी उसकी बात सुनने वाला नहीं है।
अगले हफ्ते उसके बाबू जी ने उसके लिए एक लड़का पसन्द कर लिया, लड़के की धौलपुर में मिठाई की पुश्तैनी दुकान थी, जिसे सुनकर लता का दिल बैठ सा गया, उसके दिल में झटपटाहत सी होने लगी।
उसने अपनी फ्रेंड से उनके क्लासमेट आकाश का नम्बर लिया, आकाश क्लास में उसकी बहुत मदद करता था, इस मुश्किल वक़्त में लता को आकाश ही सहारा लगा, आजतक उसने किसी लड़के से मोबाइल पर बात नहीं की थी, उसने बहुत डरते हुए आकाश को कॉल की,
“आकाश! मैं लता बोल रही हूँ, मेरे बाबूजी मेरी शादी करने वाले हैं, मुझे अभी और पढ़ाई करनी है, मुझे तुम्हारी मदद चाहिये”
” अरे तुम चिंता मत करो, मेरी कजिन दिल्ली में सिविल सर्विस की तैयारी कर रही है, मैं उनसे बात करके तुम्हें उनके पास छोड़ आऊँगा, कब निकलना है मुझे बोल देना”
“ठीक है, तुम अपनी कजिन से बात कर लो, मुझे बहुत घबराहट हो रही है, अब मुझे जल्दी निकलना है यहाँ से”
‘ओके मैं आज रात ही उससे बात करके तुम्हें कॉल करता हूँ”
कॉल कट करते ही आकाश के चेहरे पर एक शैतानियत छा गयी।
“किसकी कॉल थी, जो चेहरे का रंग इतना गुलाबी हो गया भाई का”
आकाश को सिगरेट देता हुआ सोनू बोला
“आज तो पार्टी हो गयी यार, साली ने ३ साल फील्डिंग करवाई और अब आकर फँसी, सोनू तू रूम की जुगाड़ कर, उसको तो यहीं दिल्ली दिखानी है मुझे”
सिगरेट का गहरा कश लेते हुए आकाश हँसता हुआ बोला।
“भाई हमें भी दिल्ली देखनी है, रूम तो मिल जाएगा भाई पर वो राजन ऐसे नहीं मानेगा”
“ठीक है , कोई बात नहीं, पहले मैं फिर तुम सब मिलकर दिल्ली देख लेना”
रात को आकाश ने लता के नम्बर में कॉल की और बोला कि उसने उसके अपनी कजिन के साथ रहने की व्यवस्था दिल्ली में करवा दी है, लता ने उसे २-३ दिन इंतजार करने को बोला, उस रात आकाश ने लता से लगभग २ घन्टे बात की।
अब तो आकाश ने लता को वक्त-बेवक़्त कॉल करना और मैसेज करना शुरू कर दिया, वो उसपर घर छोड़ने के लिए दबाव बनाने लगा।
आकाश के बदले व्यवहार और उसकी घर छोड़ने की बार-बार ज़िद ने लता को ये एहसास सा दिलाया कि वो कुछ गलत कदम उठाने जा रही है इसलिए उसने अपने बाबू जी से एक बार बात करने की सोची,
“बाबू जी, मुझे और आगे पढ़ना है, मुझे अभी शादी नहीं करनी है, किसी हलवाई से तो बिल्कुल भी नहीं, मुझे अपनी जिंदगी बर्बाद नहीं करनी है”
कहते-कहते लता रुआँसी सी हो गयी।
“देख बेटा, हम कोई भगवान तो नहीं हैं लेकिन बच्चों के लिए माँ-बाप भगवान से कम भी नहीं होते, कोई भी बाप अपने बच्चों का कभी बुरा नहीं सोचेगा”
लता के सिर पर हाथ फेरते हुए बाबूजी बोले जा रहे थे,
“मैंने उनसे तेरी आगे की पढ़ाई के बारे में भी बात की है और ये भी बोला है कि अगर वो मेरी लाडो की पढ़ाई रुकवाते हैं तो उसकी पढ़ाई में करवाऊंगा, बेटा वो लड़का कोई हलवाई नहीं है, उसने मुम्बई से होटल मैनेजमेंट की डिग्री ले रखी है, वो बहुत ही स्मार्ट और सुलझा हुआ लड़का है, तू उसके साथ बहुत खुश रहेगी”
तभी लता की माँ वहीं आ गयीं।
“लता की माँ, परसों वो लोग लता को देखने आ रहे हैं, सारी तैयारी बहुत अच्छे से करके रखनी है’
“देख लाडो, तुझे अगर लड़का पसन्द नहीं आया तो कोई जबरदस्ती नहीं है शादी के लिए, बस तू एक बार लड़के को देख ले बेटा”
अब लता खुद को थोड़ा सा तनाव मुक्त महसूस कर रही थी।
दो दिन बाद लड़के वाले लता को देखने आए, उन्हें परिवार और लता दोनों बहुत पसंद आये, लड़के का नाम रोहित था, दोनों ने एक-दूसरे से बातचीत की और दोनों ने एक-दूसरे पसन्द कर लिया।
लता ने उसी दिन अपना नम्बर बन्द कर दिया और नया नम्बर ले लिया।
लड़के वालों ने दहेज के नाम पर बस लता को माँगा।
एक महीने में सारी रस्में और शादी बहुत ही धूमधाम से सम्पन्न हो गयी।
शादी के बाद रोहित ने अपने पुश्तैनी बिज़नेस को एक ब्रांड के रूप में बनाना शुरू कर दिया और लता अपनी हायर स्टडी में लगी रही, रोहित के बोलने पर लता ने राजस्थान सिविल सर्विस की तैयारी शुरू की जिसमें रोहित ने उसका हर सम्भव सहयोग किया।
२ वर्षों के कठोर परिश्रम और लगन से लता ने राजस्थान सिविल सेवा में १०वीं रैंक हासिल की।
SDM पद पर पहली नियुक्ति लता को धौलपुर ही मिली।
अपने घरवालों और ससुरालवालों के सहयोग से लता ने जिंदगी के उस मुक़ाम को हासिल किया जिसका सपना उसने देखा।
रचनाकार- अवनेश कुमार गोस्वामी
Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *