🙏जय श्री राम 🙏
🙏जय बजरंगबली हनुमान🙏
राम नाम अति पावन प्यारा ।
जप उतरे भवसागर पारा।।
जिसने इसकी महिमा जानी। कीर्ति उसकी न जानी बखानी।।
श्री हनुमान अंजना नंदन।
करते सदा राम का बंधन।।
सीताराम के मन अति भाए। सीता सूत हनुमान कहाए।।
राम नाम जो भजे निरंतर।
चले ना उस पर जादू मंतर।।
राम छवि भरी हृदय के अंदर।
लॉघ गए कपि सात समंदर।।
लंका जाई के धूम मचाए।
नवनिधि के दाता कहलाए ।।
निज सूत कह दि जनक दुलारी। अब तुम हो संतान हमारी।।
सियाराम छवि हृदय बसा के। चल दिए हनुमत लंक जराके।।
भक्ति भाव जो भर ले मन मे ।
कीर्ति -यस पावे वो जग में।।
जनम- मरण बंधन कट जावे। कृपा निधान की शरण जो जावे ।।
भजती रहूं नित नाम तुम्हारा। और ना हो कोई काम हमारा।।
ऐसी कृपा कर दो रघुराई ।
शरण खड़ी मैं शिश झूकाई।।
🙏 जय ,जय श्री राम 🙏
स्वरचित व मौलिक रचना
रचनाकार :नूतन राय
