कभी दबा दी जाती है, 
कभी छिपाई जाती है। 
संसद में मुद्दों पर बहस, 
आवाज उठाई जाती है।।
कभी बुलंद होती यही कलम
जन-जन की बनती आवाज 
कलम के सिपाही की लेखनी
संचार तंत्र की एक आवाज
उर पटल पर दस्तक देती,
भावविभोर करें मन को। 
संदेश संप्रेषित करती, 
हर खास हर आमजन को।
दिल को दहला भी सकती, 
दिल को झकझोर भी सके। 
एक आवाज मीडिया में उठे
कुर्सी हिले तख्त ताज पलटे
मत जकड़ो यूं मीडिया को 
इन जंजीरों और बेड़ियों में
जब-जब सत्ता नशे में लूड़की
साहित्य ने संभाला सीढ़ियो में 
जनता की आवाज है भाई
इनमें छपे हर शब्द गूंजायेंगे
पत्र-पत्रिका रेडियो टीवी सब
समाचार जनता तक पहुंचाएंगे
यह अखबार पत्र पत्रिकाएं
समाचार पत्र मीडिया के अंग
लोकतंत्र में ये आंख नाक कान 
सजग प्रहरी पत्रकारिता के रंग
रमाकांत सोनी नवलगढ़
जिला झुंझुनू राजस्थान
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