देकर खुद को पीड़ाएँ
जग को दर्द की बात बताओ ,
या इतना काम करो खुद से की
खुद को खुद का फर्ज बताओ।
काट दो मन की जंजीरे
जीवन का बस शूल यही है ।
जग में जीवन का मूल यही है ।
जब तक चिड़िया रहे बाग में
जीवन का मधुगान रहेगा ,
जब तक स्वाभिमान जिंदा है
हर सर पर आसमान रहेगा।
मत हो ऋणी किसी और के
जीवन का बस भूल यही है।
जग में जीवन का मूल यही है।
अगर जगति में नाम करना है
तो खुद को साज बनाना होगा ।
भूत भविष्य का छोड़ पहले
खुद को आज बनाना होगा।
ये दर्द का आँचल नहीं है पगले
जीवन का बस फूल यही है।
जग में जीवन का मूल यही है !
