कहते थे बडे बुजुर्ग,लाल मेरा डाक्टर बनेगा,
लोगो को देगा सांसे नई, ये एक दिन रूप भगवान का बनेगा!
करके जीवन भर की पूंजी इकट्ठी, भेज दिया लाल को परदेश मे,
क्यूंकि सपने पूरे हो नही रहे थे जमापूंजी से भी अपने देश मे!
बिना लाल के मां-बाप, सपने कामयाबी की लाल के सजा रहे थे,
दिन-रात करके विनती प्रभु से,टकटकी दरवाजे पर लगा रहे थे!
छिड गया युद्ध और हुआ वो गोली का शिकार आंख का तारा,
जो था अपने बूढ़े मां-बाप की उम्मीद और बुढापे का सहारा!
काश मिल गया होता उसे मौका अपने सपनो को पूरा करने का,अपने ही देश मे🙏
श्वेता अरोडा
