पानी में शराब को मिलाया ना करों….
हम भुल जाते है खुद को भी….२)
तुम यूँ सामने आया ना करो….२)
वो आईना तुमको समझ बैठगा…..२)
यूँ चाँद से तुम नज़र मिलाया ना करों….२)
सही को सही कहने का हुनर रखो….२)
हर बात पे, हर बात पे यूँ सिर हिलाया ना करों….
कोई देख लेगा आते हुए तुमको….२)
चांदनी रात में तुम मिलने आया ना करों….२)
ऐसे शब्दों को तुम पिरोया ना करों…. २)
पानी में शराब को मिलाया ना करों….
आरती सिरसाट
बुरहानपुर मध्यप्रदेश
मौलिक एवं स्वरचित रचना
