हर खुशी है लोगों के दामन में
पर चलचित्र का वक्त नही
दिन रात दौडती दुनिया में
जिंदगी के लिए वक्त नही
माँ की लोरी याद तो है
चलचित्र में माँ का एहसास तो है
माँ को मा कहने का वक्त नही
सारे रिश्तों को मार चुके हैं
अब उन्हें दफनाने का वक्त नही
बचपन के दिनो को याद करके
भाई बहन और दोस्तों से टकरार को याद करके
पर दोस्ती के लिए वक्त नही
गैरो की क्या बात करें
अब अपनो के लिए वक्त नही
याद नहीं कब मुस्कुराए थे हम
पैसे की दौड़ में ऐसे दौडे
कि थकने का वक्त नही
पराये इंसानों की क्या कद्र करें
अपने सपनों के लिए वक्त नही
तुज ही बता ऐ जिंदगी
इस जिंदगी का क्या होगा
हर पल मरने वालों को
अब सोने का वक्त नही
गैरो की क्या बात करें
अब रोने का वक्त नहीं
रंजना झा
