जी लिए जाते हैं कुछ पल, और,
गुज़र कर भी वो यादों में ज़िंदा रह जाते हैं 
ज़िदगी थम जाती है उन लम्हों में, 
और पल कभी अंतःकरण में,कभी आंखों के आगे चलचित्र की तरह चलते हैं । 
वो लम्हे कभी बीत कर भी नहीं बीतते,
जो वक्त की तरह गुज़ारे नहीं जाते, 
जीवन की तरह जिए जाते हैं!
शालिनी अग्रवाल 
जलंधर
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