गलतियों का पुलिंदा हूँ मैं 
हाँ क्योंकि इंसान हूं मैं…
सजा तो मिल ही जानी है दोज़ख की
हूं नहीं कोई फरिश्ता..
बस एक आम इंसान हूं मैं,
भावनाओं का दरिया हूं,
पल पल बह जाता है
गर्दिशो का दौर है छाया ..
उलझने है राहों में कई
सुलझनो का कोई सबाब नहीं
जिंदगी की पगडंडियो पर
कभी हार है तो कभी जीत
कभी सुःख का पलड़ा भारी है
कभी दुःख की गठरी भारी है,
हूँ एक तुच्छ इंसान मैं 
इसीलिए कर लिया स्वीकार मैंने,
गुनहगार हूं मान लिया,
हाँ गलतियों का पुलिंदा हूं
क्योकि बस एक इंसान हूँ मैं
जीवन के हर मोड़ पर
राह एक नई बनानी है,
गलतियों से सीख कर
गलतियाँ ना दोहरानी है,
हाँ बस इंसान ही हूँ मै…..
निकेता पाहुजा
रुद्रपुर उत्तराखंड
Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *