वो मुझे चकोर का चांद से
प्रेम के बारे में बता रहा था।
कैसे चकोर खामोशी से
चाँद से प्रेम करता है।
समझा रहा था।
निहारता है एकटक
दूर से गगन में,
चाँद को देखता है।
और इस तरह अनकहे
अपने प्रेम को निभाता हैं।
उसकी बातें सुन में
मन ही मन मुस्काई,
उसे क्या पता जिस
प्रेम को वो मुझे समझा रहा है
उस प्रेम को तो मैं
खुद ही जी आई।
और वो मुझे…..।
बेजुबाँ इश्क मेरा, बस तुझे खामोशी से पुकारता हैं।
गरिमा राकेश ‘गर्विता, गौत्तम
कोटा राजस्थान
