कविता
दोहा
खरबूजे को देखकर, खरबूजा बदले रंग ।
सब संगति का है असर रंग मिले, या भंग।
गीत कविता
तर्ज झिलमिल सितारों से….…
खरबूजे को लख खरबूजा रंग है बदलता।
जैसा खाद बीज पानी ,तरु वैसा फूलता फलता।
1 इक तोते के दो बच्चे थे, दोनों भाई भाई।
एक को पाला था साधू ने,इक ले गया कसाई।
टेक एक राम नाम, दूजा बिष है,उगलता 0…
2 बच्चे सदा बड़ों से सीखे, संस्कार मर्यादा।
माता प्रथम गुरु बच्चों की, बच्चे सीखते ज्यादा।
टेक हंसाता है कोई तो कोई है,छलता 0………..
3 पक्के खरबूजे के पास में कच्चा भी पक जाता है।
देख के खरबूजे को पास खरबूजा रंग बनाता है।
टेक जग में हमेशा केबलराम नाम चलता 0……….
खरबूजे को लख खरबूजा रंग है बदलता।
बलराम यादव देवरा छतरपुर

