पूछा नहीं किसी ने कि, क्यों लहू बहाया करता हूँ।
उड़ा दिया हंसी में सबने, क्यों दर्द सुनाया करता हूँ।।
पूछा नहीं किसी ने कि —————————-।।
मेरे लहू की बूंद पर , यकीन नहीं है किसी को।
नहीं किसी को रहम, क्यों अश्क बहाया करता हूँ
पूछा नहीं किसी ने कि —————————।।
कहते हैं लोग अक्सर यह, मैं हूँ बहुत मतलबी।
समझा नहीं किसी ने, क्यों जख्म दिखाया करता हूँ।।
पूछा नहीं किसी ने कि —————————-।।
मिलाता नहीं है कोई हाथ, कहते हैं बेवफ़ा हूँ मैं।
नहीं लगाया किसी ने गले, क्यों याद दिलाया करता हूँ।।
पूछा नहीं किसी ने कि —————————-।।
मिट गया अब शक मेरा, जीना है अब खुद के लिए।
नहीं किसी की करनी मदद,क्यों गीत यह गाया करता हूँ।।
पूछा नहीं किसी ने कि —————————–।।
क्या मैं हिंदुस्तानी नहीं, क्या प्यार वतन से करता नहीं।
देखा नहीं रंग क्यों लहू का, लहू जो दिखाया करता हूँ।।
पूछा नहीं किसी ने कि —————————–।।
साहित्यकार एवं शिक्षक-
गुरुदीन वर्मा उर्फ जी.आज़ाद
तहसील एवं जिला-बारां(राजस्थान)
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