क्या लिखूं मां तुम्हारे बारे मे मुझमे कहां ओ दम है।
कितना भी करूं गुणगान तेरा ओ बहुत ही कम है।
नौ महीने तुमने हमको अपने गर्भ मे सजाया।
आते ही दुनियां मे हमको आंचल मे छुपाया।
पकड़ कर तेरी उंगली को धीरे धीरे बड़ा हुआ।
गोद मे तेरी गिर गिर के धीरे धीरे खड़ा हुआ।
चूम लूं धूल तेरे चरणों का तुमको बारंबार नमन है।
कितना भी करूं गुणगान तेरा ओ बहुत ही कम है।
देख थोड़ा सा बुखार मन ही मन तेरा ओ घबराना।
पानी से भींगी कपड़े की पट्टी ओ माथे पे लगाना।
कर तेल की मालिश हाथों से हड्डी मजबूत बनाई।
करना सम्मान सभी का बेटा न करना कभी लड़ाई।
तेरी क्षत्र छाया मे मां हुई कभी न आंखे मेरी नम है।
कितना भी करूं गुणगान तेरा ओ बहुत ही कम है।
नींद मिले भरपूर मुझे तेरा रात रात भर ओ जगना।
सो जा मेरा सोना बेटा मुस्का मुस्का तेरा ये कहना।
बढ़ाते और डगमगाते कदम उठा के मेरा ओ चलना।
रखकर पैनी निगाह बनके कवच झट तेरा पकड़ना।
बिन मां लगता सच मे अधूरा ये सारा… जीवन है।
कितना भी करूं गुणगान तेरा ओ बहुत ही कम है।
स्वरचित .....✍️✍️ केके