आज राहुल अकेला ही कानपुर सेंट्रल पर इंटरसिटी का इंतज़ार कर रहा था, उसके दोनों दोस्त आज कानपुर में ही रुक गए थे, बोरियत से बचने के लिये उसने पिछले दो घण्टे से इयरफोन कानों से नहीं निकाले थे, पीठ पर एक छोटा सा बैग जिसमें एक-दो बुक्स, मोबाइल चार्जर और कुछ छोटा-मोटा सामान था।
धीरे-धीरे कानपुर सेंट्रल स्टेशन के वातावरण को हल्के कोहरे ने अपने आगोश में लेना शुरू कर दिया था, अभी ट्रेन का कुछ देर और इंतज़ार करना था तभी उसकी नज़र दो लड़कियों पर पड़ी, वो दोनों कॉलेज स्टूडेंट सी लग रहीं थीं, उन दोनों में से एक सांवली सी लड़की जो राहुल को बेहद आकर्षित कर रही थी, किशोरावस्था और युवावस्था के मध्य की संवेदनशील आयु में विपरीत लिंगी के प्रति आकर्षण प्राकृतिक है, राहुल ने एक कप चाय ली और चाय का कप हाथ में लेकर उन दोनों लड़कियों के पास जाकर खड़ा हो गया।
दोनों लड़कियां अपनी ही दुनियाँ में खोई हुई, खिलखिलाती हुई आपस में बातचीत करने में मगन थीं, राहुल चाय की चुस्कियां लेता हुआ उन्हें ही ताड़ने में लगा हुआ था तभी सांवली लड़की की नज़र उसके ऊपर पड़ी, बड़ी-बड़ी सुरमई नज़रो के अचानक से हुए इस वार से राहुल सकपका सा गया, लेकिन ये क्या, उस लड़की के होंठों पर एक बारीक़ सी बहुत ही प्यारी मुस्कान तैर गयी, उंसने गहरी नज़रों से राहुल को देखा।
युवा लड़के अपनी आदतों से मजबूर होते हैं, अन्य वन्य प्राणियों की भाँति ही वो भी मादा को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए भिन्न-भिन्न प्रकार की रोचक क्रिया-कलापों का सहारा लेते हैं।
कुछ देर बाद ट्रेन आकर स्टेशन पर रुकी, यात्रियों के बीच चढ़ने और उतरने के लिए एक शारीरिक जद्दोजहद शुरू हो गयी लेकिन इन सबसे अलग राहुल एकदम शांत खड़ा हुआ था कारण सिर्फ एक ही था उन दोनों खूबसूरत लड़कियों के पीछे चढ़ना, सांवली लड़की अच्छे से समझ गयी थी कि वो उसी के लिए ही उसके पीछे खड़ा है, वो भी कनखियों से शरारत भरी नज़रो से उसको देख रही थी, एक युवा लड़के को आज के दौर में इससे ज्यादा और क्या चाहिए।
प्रेम और रोमांस के प्रतिनिधि शाहरूख की कई फ़िल्मो को ध्यान में रखते हुए राहुल भी उस समय बेहद सम्भ्रांत और शिक्षित होने का लाजबाब अभिनय कर रहा था, वो लड़की भी किसी मंझे हुए निर्देशक की भाँति उसके इस झूठे अभिनय को बारीकियों से जाँच रही थी।
जब दोनों लड़कियां ट्रेन में चढ़ गयीं तो राहुल भी उनके पीछे-पीछे उसी डिब्बे में चढ़ गया, सीट तो मिलनी ही नहीं थी इसलिए वो तीनों एक सीट के पास खड़े हो गए, राहुल साँवली लड़की के बिल्कुल बग़ल खड़ा था, जिसकी राहुल को उम्मीद भी नहीं थी उस साँवली लड़की ने राहुल से बातचीत शुरू कर दी और कुछ देर के इस वार्तालाप में ही उन दोनों ने पढाई-लिखाई से लेकर कुछ व्यक्तिगत जानकारी भी एक-दूसरे से शेयर कर ली, बातों ही बातों उन दोनों लड़कियों को ये पता चल गया कि वो अकेला है फिर वो दोनों लड़कियां ने आपस में कुछ गम्भीर विचार विमर्श करने लगीं, फिर वो दूसरी लड़की अपने मोबाइल में व्हाट्सएप चैटिंग में बिजी हो गयी, राहुल ने उस सांवली लड़की, जिसने अपना नाम वीना बताया था उससे उनकी समस्या पूँछी,
“एक्चुअली हमारा गांव दिबियापुर से लगभग १ किमी दूर है और आज हमारे साथ गांव का कोई लड़का भी नहीं है इसलिये वीना अकेले रात में घर जाने को लेकर थोड़ी सी परेशान हो रही है”
दूसरी लड़की पूजा ने राहुल से कहा, ये बता कर उसने राहुल को उन्हें घर तक छोड़ने का एक अप्रत्यक्ष आमंत्रण दे दिया, कुछ देर बाद उन तीनों को एक सीट मिल गयी।
वीना, राहुल की बग़ल में कुछ ज्यादा ही सट कर बैठ गयी, उसके नवविकसित माँसल उभारों की छुअन से राहुल को एक मधुर सा मखमली एहसास हुआ, वो उससे और सट के बैठ गया, शारीरिक आकर्षण सिर्फ अन्धा ही नहीं होता है बल्कि मूर्ख भी होता है, राहुल ने मूर्खता का अपार परिचय देते हुए उन दोनों को घर तक छोड़ के आने के लिए तैयार हो गया, ये निर्णय लेने से पहले उसने एक बार भी नहीं सोचा कि ये लड़कियां किसी को भी अपने घर से स्टेशन तक बुला सकती हैं।
“राहुल प्लीज् आप रहने दीजिए, आप क्यों परेशान होते हैं, आप घर वापस कैसे जायेंगे”
कहते हुए वीना ने अपने कोमल हाथों से उसके हाथ को दबा दिया, शारीरिक स्पर्श का जादू यूँ ही नहीं उतरता, अब राहुल नहीं मानने वाला था क्योंकि वीना ने राहुल को पूर्णरूप से शारीरिक मोहपाश में फंसा लिया था, राहुल ने सोचा कि घर व्हाट्सएप पर लेट आने का मैसेज कर देता हूँ लेकिन उसके मोबाइल में नेटवर्क नहीं आ रहा था।
फिर झींझक स्टेशन निकल गया, राहुल नहीं उतरा बल्कि वो सोच रहा था कि कल साले सब दोस्तों की जलानी है कि ट्रेन में २ घण्टे में ही सेटिंग कर ली, वो वीना का नम्बर लेने की सोच रहा था, ट्रेन दिबियापुर पहुँचने वाली थी दोनों लड़कियां राहुल के साथ दरवाजे के पास आकर खड़ी हो गयीं, वीना ने धीरे से राहुल का हाथ पकड़ लिया मानो वो उसका दिल से आभार व्यक्त कर रही हो।
वो तीनों दिबियापुर स्टेशन पर ट्रेन से उतर गये, राहुल की छठी इंद्री उसे किसी अनहोनी घटना के घटित होने का संकेत दे रही थी लेकिन शारीरिक मोह-पाश में फँसा वो वीना के पीछे चल पड़ा, उसे ना जाने क्यों अपनी माँ की अक्सर दी जाने वाली सीख याद आ गयी कि किसी भी अनजान व्यक्ति पर जल्दी भरोसा नहीं करना कभी।
स्टेशन के बाहर चारों तरफ बार घना कोहरा छाया हुआ था, स्टेशन के बाहर एक ऑटो खड़ा था शायद ऑटोवाला उन्ही का इंतजार कर रहा था, वो तीनों ऑटो में जाकर बैठ गये, ऑटोवाले ने उनके बैठते ही ऑटो बढ़ा दिया,अजीब था ना ऑटोवाले ने उनसे कुछ पूँछा और ना उन दोनों ने भी कुछ नहीं बताया, राहुल ने अपनी घड़ी में टाइम देखा तो रात के 9:25 हो रहे थे, दिबियापुर से निकल कर ऑटोवाले ने ऑटो एक कच्चे रास्ते पर ले लिया, गहरी अंधेरी रात और रास्ता एकदम सुनसान था, रास्ते के दोनों तरफ खेतों में बड़ी-बड़ी मक्का खड़ी हुई थी।
अचानक से ऑटोवाले ने ऑटो रोक लिया,उस सुनसान रास्ते पर ऑटो का रुकना राहुल को कुछ सही नहीं लगा और तभी,
“चलो मिस्टर राहुल त्रिपाठी तुम्हारा स्टेशन आ गया”
वीना ने राहुल को ऑटो से धक्का देकर नीचे गिरा दिया।
“ये क्या बदतमीजी है, तुमने धक्का क्यों मारा मुझे”
राहुल अब काफी कुछ समझ गया,उसने वहाँ से भागने की कोशिश की तभी पीछे से किसी ने उसके दोनों पैरों में लोहे की रॉड से वार किया,वो गिर कर भयानक दर्द से बिलबिला उठा, वो दोनों पैरों को पकड़ कर झटपटाने लगा, वो उन तीनों के आगे हाथ जोड़कर बोला,
“मैंने क्या बिगाड़ा है तुम लोगों का, मुझे जाने दो, प्लीज छोड़ दो मुझे”
कहकर वो वीना के पैरों से लिपट गया, वीना ने उसकी जेब से मोबाइल और पर्स निकाल कर मोबाइल स्विच ऑफ करके अपने पर्स में रख लिया।
तभी एक मारुति वैन वहाँ आके रुकी और उसमें से चार तगड़े साये बाहर निकले।
“कैश लाये हो”
ऑटोवाले ने उन चारों से पूँछा, उनमें से एक ने बंडल उसकी तरफ फेंका।
“कितना है”
“पूरे डेढ़ लाख हैं, गिन लो”
“लेकिन बात तो २ लाख की हुई थी”
“२ की बात लड़की के लिए हुई थी, तू ठीक सा माल लाकर दे, राजन भईया तुमको ३ भी देने को तैयार हैं”
“ठीक है, जल्दी से उठा कर ले जाओ इसे”
उसने तड़पते हुए राहुल की ओर इशारा किया।
“मैं तुम्हें बहुत पैसा दिलवा दूँगा प्लीज छोड़ दो मुझे”
राहुल उन सबसे रोते-गिड़गिड़ाते हुए उसे छोड़ने की मिन्नतें कर रहा था।
चारों में से दो सायों ने उसके मुँह, हाथ और पैरों को काले टेप से पैक किया और गाड़ी में डालकर ले गये।
वो तीनों ऑटो में बैठ के अपना-अपना हिस्सा बाँट रहे थे, हरे – हरे नोट को देख वीना की आंखों में एक वहशी चमक आ गयी थी।
एक नए शिकार की तलाश में वो तीन मानव भेड़िये फिर से एक नए सफर पर निकल पड़े थे।
सफर अभी भी जारी है …..🚇🚇🚇🚇
                       ✍️  समाप्त  ✍️
रचनाकार – अवनेश कुमार गोस्वामी
Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *