कोहरे की रात्रि
शिशिर से कांपता तन
हीटर दग्ध कक्ष
उष्ण कंबल में छिप
कोहरे की रात्रि
शिशिर से कांपता तन
नभ नीचे शयन
पतली चद्दर तन
कोहरे की रात्रि
शिशिर से कांपते जंतु
एक दूजे से लिपट
शीत बचाने की जुगत
कोहरे की रात्रि
विविधता भरा जीवन
गरीबी उन्मूलन का नारे
कितने सच कितने झूठ
दिवा शंकर सारस्वत ‘प्रशांत’
