लिख दूँ खत तुम्हारे नाम का
आखिरी पैगाम हो तुम्हारे ख़्यालात का,
लाख चाहूँ फिर भी रुक जाती है कलम
कैसे लिख सकती हो तुम आखिरी पैगाम मोहब्बत का,
रुस्वाईया चाहे लाख हो तेरे मेरे बीच
मोहब्बत का बवंडर मन में थमता ही नहीं,
रह रह कर उठ जाता है इश्क ए सैलाब
कैसे लिख दूँ तुम्हें आखिरी पैगाम मोहब्बत का,
गुफ़्तगू का सिलसिला हौले हौले ठहर रहा
कैसे कह दूँ दिल में नहीं हो तुम,
कैसे कह दूँ मैं संग नहीं तुम्हारे,
कैसे कह दूँ इश्क ए बरसात मुझपर बरसी नहीं,
होना चाहता है सराबोर ये दिल फिर से
तेरी मोहब्बत की बरसात में
रात भर गुज़रती है वीरान सी
काश लिख पाऊं तुम्हें कभी इश्क से एहसास मेरे
ताउम्र रोशन रहेगा तेरे इश्क़ का चराग मुझमें,
ताउम्र सराबोर रहेगा मेरा अक्स तेरे इश्क की खुशबू से,
ताउम्र बरकरार रहेंगे मेरे अनकहे से एहसास तुम्हारे लिए,
कैसे लिख दूँ खत आखिरी तुम्हारे नाम
हो ग़र जो बस में मेरे,
मैं तो अपनी ज़िंदगानी तेरे नाम लिख दूँ
लिख दूँ अपने दिन और रात तुम्हारे नाम
लिख दूँ मेरी रूह, मेरी सांसे तुम्हारे नाम
नामुमकिन है मेरे लिए लिखना
आखिरी खत तुम्हारे नाम……
निकेता पाहुजा
रुद्रपुर, उत्तराखंड
