बदल गई है प्रकृति और ऋतुयें भी,
वक़्त के साथ सन्तुलन बनाने के लिए, 
अपने को संवारने और खुश दिखाने को,
पहुंच गए हम भी प्रगति के शिखर पर,
और हमारी परम्परायें और सभ्यता,
 बदल गई है हमारे जीवन और व्यवहार में।
जाति और गरीबी के आधार पर शोषण में वृद्धि है,
भूल गए हम अपनी संस्कृति के संस्कारों को,
राम के आदर्शों को अपने जीवन से दूर कर दिया,
सीता स्वरूप आदर्श पत्नी एक बोझ है जीवन में,
कृष्ण , अर्जुन और युधिष्ठिर को पर्दे के पीछे रखा है।
जाति – धर्म और मजहबी झगड़ों में इजाफा हुआ है,
नारी के शोषण और उसके साथ दुष्कर्म में वृद्धि हुई है,
आडम्बरों , अंधविश्वासों और पाखंडों में वृद्धि हुई है,
दोस्ती , रिश्तों और सम्मान में भेदभाव बढ़ा है,
जबकि हमारी साक्षरता में तो इजाफा हुआ है।
दौलत और शोहरत को देखकर बनते हैं रिश्ते अब,
दहेज प्रथा और कन्या भ्रूण हत्या में वृद्धि हुई है,
हालांकि नारी शिक्षित और सक्षम बन गई है,
देश के उच्च राजनीति पदों पर नारी पहुंची है,
हर विभाग के उच्च पदों और आसमां को,
नारी ने छुआ है अपनी प्रतिभा के दम पर,
फिर वंश की वृद्धि के लिए पुत्र की मांग,
नर और नारी की मानसिकता से नहीं मिटी है,
कितने हम बदले हैं और कितनी हमारी मानसिकता।
शिक्षक एवं साहित्यकार- 
गुरुदीन वर्मा उर्फ जी.आज़ाद
तहसील एवं जिला- बारां(राजस्थान)
Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *