रंग चांदी सा,घुँघराले बाल
कजरारे नैन,गुलाबी गाल
लब ज्यों गुलाब की पंखुड़ी
धरा पर उतर आया हो
जैसे चौदहवीं का चाँद
देख कर जिसे हो जाएं दंग
चाल चले जैसे हो मस्त मलंग
मदहोश कर देने की कातिल अदा
कौन होगा जो न हो जाए फिदा
होठों के नीचे का काला तिल
ले जाये हर आशिक़ों का दिल
कमर तक लहराती नागिन सी चोटी
कर दे हर एक की नीयत खोटी
बूढ़े हो या जवान जिसे देख
सदा ही आहें भरते है
खुदा कसम सब उसपर
दिलोजान से मरते हैं…..
नेहा शर्मा
