औरत तेरे कई रूप
किस किस का बखान करूं
मैं तों हूॅं अदना सा व्यक्ति
किस तरह तुम्हारा गुणगान करूं ?
चोट देखकर कोई पूछे तो
बाथरूम में फिसल गई थी
पति के किए कर्म पर परदा डाल
मेरी ही गलती थी यह कह गई थी ।
ताने सुन सुनकर भी वह
औरत काम कर रही है
मां – बाप ने कुछ भी नहीं
सिखाया रोज ही सुन रही है ।
कसम खाकर कहती हूॅं मां – बाप
भाई – बहन और आपके सिवा
किसी को भी नहीं चाहा है
यकीन नहीं तो मालूम कर लीजिए
सच सुनकर भी उसने औरत को ही मारा है ।
प्यार पर विश्वास नहीं अब
सरेआम उसे लूटा है
सर्वस्व न्योछावर करने के बाद
उसे सिर्फ धोखा ही तो मिला हैं ।
उसकी ही बातें हो रही हर जगह
कम कपड़े पहनकर घूमती थी
होना ही था उसका बलात्कार
खुद ही तो न्योता देती थी ।
व्रत कर ईश्वर से अपने पति की
लंबी उम्र की प्रार्थना करती हैं
अपनी उम्र कितनी हो उसकी परवाह नहीं
औरत ऐसी ही तो होती है ।
खुद ना खाकर भी
बच्चों का पेट भरती है
पानी पीकर भी रहना पड़े फिर भी
किसी और से कुछ नहीं कहती है ।
अपने आप को बेबस महसूस कर
हर दुख – दर्द वों सहती है
शराबी पति की पिटाई खाकर भी
अपना परमेश्वर उसी को कहती है ।
छोटों से लेकर बड़ों तक
सबकी परवाह वह करती हैं
परिस्थितियां कैसी भी हो
वह अपनी परवाह कभी नहीं करती हैं ।
अपने घर में अपने पति से
रोज ही तों पिटती हैं
उसी पति को किसी और से पीटने पर
वह ही तो बचाने दौड़ती हैं ।
स्वयं पर हो रहें अत्याचारों को
अपना नसीब समझ कर जो चुप रहती है
अपनों को जब साथ देने की बारी आती है
सबसे पहले वही औरत आवाज उठाती है ।
औरत तेरे इतने रूप देखकर
हृदय तुम्हें नमन करता है
एक बात मेरी समझ में
आज तक नहीं आई है
दूसरों के लिए लड़ने वाली तुम
अपने लिए क्यों नहीं लड़ पाती हो ?
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धन्यवाद 🙏🏻🙏🏻
गुॅंजन कमल 💓💞💗
