उन रेशों को मत उधेङना
जो बारीकी से गुंथे हुए हैं ।
जिन पर रिश्तों की बुनियाद है,
उन कङियों को जरा सम्भाल कर रखना ;
ये बङे नाजुक हैं ।
कि जरा अहमियत इनकी बचाए रखना,
सिर्फ लेन देन की तराजू पर मत तौलना
कि भावों का तो कोई मोल नहीं होता।
—-“पाम”
किसी के समर्पण को उसकी कमज़ोरी
न समझना ;
कि संस्कार के लिबास में
परम्पराओं को कोई तो वहन कर रहा।
मत करना अवहेलना,
किसी की सरलता का।
कि सरलता ही शिवत्व है,
और मुक्ति का द्वार भी !!
✍️ पल्लवीकुमारी”पाम
अनिसाबाद, पटना,बिहार
