अंतस में उठते,
भीगे से,
सतरंगी सपने,
भीगी पलकें,
लग रहा है,
आसमां से,
उतर आयेगा,
धरा पर,
ज्यौं धनुष सतरंगी,
उतर आया हो,
धरा पर,
लाल हरा,
आसमानी,
नीला पीला नारंगी,
मिल गये सब,
एक दूसरे से,
आकर धरा पर,
लगता है,
तीर छोड़ा इंद्र ने,
विलुप्त हो,
आसमां से,
इंद्रधनुष सतरंगी,
मिलने को आतुर,
धरा से ।
काव्य रचना-रजनी कटारे
जबलपुर म.प्र.
