लो आ गया नववर्ष लेकर नई उमंगे
खुशहाली की चादर ओढ़े लेकर नई तरंगे!!
भरलो मुट्ठी प्रेम की  और छोड़ दो सारी रंज़े 
खोल दो दिल की गांठो को और बांध लो खुशी के लम्हे!!
क्या खोया और क्या पाया है इसकी चिंता छोड़ो
बड़े भाग मानस तन पाया उसकी कीमत समझो!!
लो आ गया नववर्ष लेकर नई उमंगे
खुशहाली की चादर ओढ़े लेकर नई तरंगे!!
जो सोचा था कल कर लेंगे उसको आज ही करना
टालमटोल की ये आदत से तौबा अब कर लेना!!
बेवजह ही लुटा आना कुछ प्यार अपनो पर भी
देखना मिलेगा तुम्हें भी भरपूर कभी न कभी!!
लो आगया नववर्ष लेकर नई उमंगे
खुशहाली की चादर ओढ़े लेकर नई तरंगे!!
सपनों के आसमान को पाना चाहते हो तुम अगर 
तो थाम लेना नेकी का हाथ और चलना सच्चाई की डगर पर!!
जो संकल्प लेते हो हर वर्ष वो इस बार ज़रूर पूरे कर लेना
कल में नही तुम आज में ही जीने की आदत विकसित कर लेना!!
लो आ गया है नववर्ष लेकर नई उमंगे
खुशहाली की चादर ओढ़े लेकर नई तरंगे!!
खोलो मन के द्वार ज़रा इसमें आध्यात्मिक तेज़ भर लेना 
चरित्र की शक्ति ही सबसे बड़ी है ये संस्कार बच्चों में भर देना!!
आत्मसम्मान से जीने की प्रेरणा ख़ुद में समाहित कर लेना
दर्प,कायरता से हे प्रभु इस नववर्ष भी बचा लेना!!
लो आ गया है नववर्ष लेकर नई उमंगे
खुशहाली की चादर ओढ़े लेकर नई तरंगे!!
नव वर्ष की बहुत-2 शुभकामनाएं
 
एकता श्रीवास्तव ✍️
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