आज और गुज़रे हुए ज़िन्दगी मे 
बहुत फर्क होगया है
पहले जहाँ हर दिल मे
विश्वास व निश्चिल प्रेम हुआ करता था
वही आज हर एक दिल मे
भेदभाव और द्वेष भरने लगा है
वो क्या समय था न ज़िन्दगी के
ज़ब हर एक परिवार एक साथ रहते थे
पीढ़ी दर पीढ़ी बीतते जाती थीं
पर बटवारे तो क्या
ज़िन्दगी मे अपनों से अलग रहने की भी
कोई नाम तक नहीं लेता था
कोई गर किसी से कुछ बात कह दें
लोग आँख बंद कर के विश्वास करते थे
पर अपनों के खिलाफ
कुछ सुनना भी
किसी के लिए गवारा नहीं होता था
साँसे टूट जाती थीं ज़िन्दगी से
पर दिलो से प्यार और विश्वास
कभी भी तोड़े नहीं टूटता था
कोई मत भेद हो भी जाए घर मे
तो बड़े बैठ कर प्यार से
उस मतभेद को सुलझाते थे
कैसा भी रिश्ता हो लोग दिल से निभाते थे
किसी एक घर की इज़्ज़त को
हर कोई अपना इज़्ज़त मानता था
किसी एक के सुख दुःख मे
लोग हर कदम पर साथ निभाते थे 
कोई भी ऐसी बात
जो परिवार को शर्मिंदा करे 
घर के चार दीवारी से बाहर नहीं जापाती थीं
उस समय दुनिया मे
अदालत नाम की कोई नियम भी है
किसी के लिए मायने नहीं रखता था
बल्कि हर कोई क़ानून व अदालत के पेच मे पढ़ना
सबसे बढ़ी श्राप व ज़िन्दगी मे सज़ा मानते थे 
एक मिशाल कायम कर गए है
सच्चे इश्क़ और दिल से हुए मोहब्बत
जिसकी दुहाई आजतक लोग प्यार मे देते है
मर मिटे दीवाने पर
ज़िन्दगी मे इश्क़ दिल से न कम हुआ
किसी भी सबूत व
कोई शर्थ की मोहताज न रहे
लेकिन…….
आजकल ऐसा कुछ भी नहीं है
बिलकुल इन सबसे अलग
ये दुनिया एक युद्ध का मैदान बन चुका है
छोटी छोटी मतभेद से भी
लोग अदालत व क़ानून के दरवाज़े तक पहुंच जाते है
बचपन बीत गया बच्चे बड़े होगए
शादी हुआ नहीं की बटवारे के लिए
कोर्ट मे केस दर्ज़ होने लगते है
दो पति पत्नी के बिच थोड़ी मन मुटाव हुआ
बाकि किसी का परवाह किये बिना
बिलकुल देर नहीं लगता उन्हें
तलाख के पेपर पर हस्ताक्षर कर देते है
इससे किसी के ज़िन्दगी पर क्या असर पढ़ता है
किसी को कोई परवाह नहीं होता
बस अपने मन के भड़ास निकलना चाहिए
बड़े घर के बच्चे है कोई कुछ नहीं कहेगा 
राह चलते किसी घर के इज़्ज़त को
पैरो तले कुचल दे या ज़लील कर दें
आँखों के सामने होते अन्याय को भी अनदेखा कर देते है
कोई भी लड़की अपने मान सम्मान के लिए
थोड़ी आवाज़ भी उठाती है तो
उस घर के माँ बाप और परिवार के सदस्यों को
इतना मजबूर कर दिया जाता है की
वो खुद पीछा हट जाते है
लेकिन दुनिया और लोगो से विश्वास भी टूट जाता है
क्योकि हम जिससे भी मिलते है ज़िन्दगी मे
उसकी स्वाभाव से हम अनुभव करते है की
इस दुनिया मे कैसे लोग रहते है
कोई बेगुनाह होकर भी सज़ा-ए -मौत काट रहे है
तो गुन्हेगार होकर भी
सरेआम नज़र उठाकर घूम रहे है
इन दुनियादारी की बात ही अलग है
आजकल तो लोग दिल से हुई मोहब्बत को भी
अदालत के कटखरे मे खड़ा करने लगे
और जो कोई एक जिस प्यार के विश्वास पर
एक दिल अपना सबकुछ कुर्बान कर देता है
वही एक दुनिया के सामने
उस विश्वास व चाहत की धज्जिया उड़ा देते है
इसीलिए शायद आजकल दिलो से
चाहत, प्यार, इश्क़ और मोहब्बत जैसे
हर अफसाने झूठे और फरेब लगने लगे है
कोई किसी पर अब सच्चा विश्वास नहीं करता
लेकिन फिर भी दिल के कोने मे
एक आस हर किसी के मन मे रहता है
की जो इस दुनिया के बनायी अदालत मे
गर हमें आज इंसाफ न मिला
तो क्या हुआ
पुरे संसार की करनी का जहाँ खाते बनते है
वो ईश्वर की बनायीं आख़री अदालत है
वहाँ किसीका भी कोई मनमानी  नहीं चलता
वो बेगुन्हाओ की इंसाफ करेंगे
जो सिर्फ सच और प्रेम की भाषा जानते है……!!
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नैना…. ✍️✍️
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