लड़े नहीं, हम लड़े नहीं,आपस में हम लड़े नहीं।।
आपस में हम भाई है, आपस में हम लड़े नहीं।।
लड़े नहीं ,हम लड़े नहीं————-।।
खुद को खुदा हम मानकर,ना हम किसी की करें बुराई।
कसमें- वादें अपने निभाये, ना करें कभी करें बेवफ़ाई।।
इज्ज़त सबकी हम करें, चाहे मजहब कोई भी हो।
माने कभी अपनी भूल भी,अपनी जिद्द पर अड़े नहीं।।
लड़े नहीं, हम लड़े नहीं————-।।
एक जमीं पर पैदा हुए हम,एक है अपना आसमां।।
बहता है एक ही लहू हम में ,अपना हो एक ही अरमां।।
बांटें नहीं हम धरती को, सुख-दुःख अपने हम बांटें।
करने में किसी की मदद हम, मुहँ कभी मोड़े नहीं।।
लड़े नहीं, हम लड़े नहीं————।।
लुट जायेगा अपना वतन, आपस में यूँ लड़ने से।
नहीं रहेगा आबाद चमन, बलवें-झगड़े यूँ करने से।।
तोड़े नहीं हम एकता अपनी, भाईचारा अपना कभी।
प्रेम के अपने बंधन को हम, कभी यारों तोड़े नहीं।।
लड़े नहीं,हम लड़े नहीं————-।।
रचनाकार एवं लेखक-
गुरुदीन वर्मा उर्फ जी.आज़ाद
तहसील एवं जिला- बारां(राजस्थान)
