आज क्यों उनको आया ख्याल, रस्म ऐसी निभाने का।
नहीं था ख्याल क्यों कल को, रस्म ऐसी निभाने का।।
आज क्यों उनको आया—————–।।
निकलते थे करके पर्दा, उनको पहचान नहीं पाऊं।
रहूँ मैं उनसे बहुत दूर, करीब पहुंच नहीं पाऊं।।
कदम क्यों नहीं बढ़ाया कल, मुझको करीब बुलाने का।
आज क्यों उनको आया—————-।।
नहीं आता था उनको रहम, मेरे ऑंसू देखकर।
बहुत हंसते थे वो मुझ पर, मेरी मजबूरी देखकर।।
दिखाया क्यों नहीं तब जोश, गले मुझको लगाने का।
आज क्यों उनको आया ————————-।।
अच्छा नहीं लगता था उनको, दर्द जब अपना कहता था।
बहुत नाराज होते थे, बात जब सच की करता था।।
किया नहीं फैसला क्यों तब, मुझको ऐसे मनाने का।
आज क्यों उनको आया—————–।।
साहित्यकार एवं शिक्षक-
गुरुदीन वर्मा उर्फ जी.आज़ाद
तहसील एवं जिला- बारां(राजस्थान)
