सोचा नहीं था वो
 ऐसा
भी कर जायेगा 
चला जायेगा ऐसे की
कभी वापस ना आयेगा 
उम्मीदों व हौसलों से भरी
शख्सियत को जाने
कहाँ पीछे छोड़ जायेगा
आशाओं का दामन उड़ा 
जाने कहाँ उड़ जायेगा
जानता नहीं कितनी पीड़ा
ये मन भर कर रखेगा
सूखे पत्ते सा ये जीवन
टूटकर बिखर जायेगा
यादों में इस तरह रहना
क्यों?
मंज़ूर किया उसने
खत्म अपने हाथों से खुद
को क्यों? किया उसने 
यहीं सब लिखा है शायद
उसने उस ‘आखिरी ख़त’ में
……..
कह नहीं पाया कोई कि
‘आस’ थोड़ी सी तो
बाकी रख जीवन में…..
मौलिक व स्वरचित
…शैली भागवत ‘आस’✍️
      
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