आज आखिरी साँसे चल रही हैं जीवन की
बहुत सी बातें अभी भी करनी है तुमसे
लेकिन अब बूढ़ी जुबान लड़खड़ाने लगी हैं
इसीलिए आखिरी खत तेरे लिए लिख देते हैं
आज न जाने वो लम्हा क्यों याद आ रहा है
जब पहली बार तुम देखने आए थे
थे तो तुम अजनबी तब
लेकिन अपने नजर आए थे
चलो आज जाने से पहले वो पल फिर से जी लेते हैं
इसीलिए आखिरी खत तेरे लिए लिख देते हैं
आज चेहरा बिल्कुल मुरझा गया है
बहुत सी बीमारियों से घिर चुका है
लेकिन आज भी याद आता है मेरा तुम्हारे जीवन मे आना
तुम्हारी दुल्हन बनकर तुम्हारे घर को महकाना
चलो आज जाने से पहले वो पल फिर से जी लेते हैं
इसीलिए आखिरी खत तेरे लिए लिख देते हैं
आज पल दो पल की ही साँस बची हैं
न जीने की अब कोई आस बची है
लेकिन आज अपना जीवन देख रही हूं अपनी पीढ़ियों में
तुम्हारा और मेरा अंश देख रही हूं सभी के चेहरे पर
चलो आज जाने से पहले इनमें खुद को ढूँढ लेते हैं
इसीलिए आखिरी खत तेरे लिए लिख देते हैं
आज वो पल भी फिर से याद आ रहा है
जब आपका प्यार नए जीवन के रूप में आया था
तब ओर भी गहरा हुआ था रिश्ता हमारा
जब हम दोनों ने ही खुद को सम्पूर्ण माना था
चलो आज जाने से पहले उन रिश्तों को फिर से जी लेते हैं
इसीलिए आखिरी खत तेरे लिए लिख देते हैं
यूँ तो मोह नही रहा अब किसी भी चीज का
पर न जाने क्यों तुझे आज भी नही खोना चाहती मै
काश कि थोड़े पल ओर मिल जाएं सँग तेरे
बस यही सोचकर मरने से डरती मैं जाती
चलो आज जाने से पहले एक दूसरे के प्यार में खो जाते हैं
इसीलिए आखिरी खत तेरे लिए लिख देते हैं
लो सुहागन जा रही हूँ क्या ये कम है
अब चाहे मैं न रहूँ पर न कोई गम है
बस जाने से पहले एक आखिरी प्यार की निशानी छोड़ देते हैं
इसीलिए आखिरी खत तेरे लिए लिख देते हैं
Note-एक पत्नी का आखिरी खत उसके पति के नाम
कोमल भलेश्वर
