आज रश्मिरथी पर दैनिक लेखन- विषय “असंभव” दिया गया है पर मेरा मंतव्य है कि इस संसार में कुछ भी असंभव नहीं है।यहाँ मैं उसी को अपने तर्कों से साबित करना चाहती हूँ। मुझे तो मेरे पिता जी ने बहुत बचपन में ही इस बात की घुट्टी पिला दी थी जो मेरे अंतर्मन में स्थायित्व ले चुकी है।
अगर दिल में तमन्ना है,मनोबल है पुरजोर, बाजुओं में है जोर, अधीरता का है टोटा एवं अनवरत प्रयास है जारी तो चलता चल राही कुछ नहीं कभी असंभव- मंजिल तेरे कदमों में है।आँखों की चमक हमेशा बरकरार रख,आशा का दीप न बुझने देना,विश्वास की ज्योति न झुकने देना निश्चित ही हर असंभव संभव में साकार हो जाता है यह अकाट्य सत्य है।
मनुष्य इस दुनिया का सबसे शक्तिशाली और बुद्धिमान प्राणी है, अगर मनुष्य चाहे तो असंभव को संभव बना सकता है। मनुष्य के लिए इस संसार के अंदर कोई भी ऐसा कार्य नहीं है जो कि असंभव हो क्योंकि भगवान ने मनुष्य को कुछ ऐसी शक्तियाँ दी हैं, जिनकी सहायता से कोई भी इंसान अपने जीवन में असंभव को संभव बना सकता है और बड़ी से बड़ी असफलता को सफलता में बदल सकता है।
मनुष्य की जो सबसे बड़ी शक्ति है वह है ”सोचने की शक्ति” जिसकी मदद से वह दुनिया की हर एक चीज को अपने लिए उपयोगी बना सकता है और उसका उचित प्रयोग करके अपने किसी भी कार्यों को पूर्ण कर सकता है, किंतु देखने में आता है कि बहुत से लोग इस दुनिया के अंदर ऐसे हैं जो कि अपने कार्यों के अंदर सिमटे हुए हैं अर्थात वो लोग अपनी सीमा के अंदर एक तरह से बंधे हुए हैं और उनका मानना है कि उससे बाहर निकलना उनके लिए लगभग असंभव है, इस तरह की सोच रखने वाले लोग जीवन में कभी भी बेहतरीन मनचाही सफलता प्राप्त नहीं कर पाते हैं।
अगर ऐसे लोगों को कभी सफलता मिल भी जाती है तो उनको सिर्फ उतनी ही सफलता मिलती है जितनी उनको उस सीमा के अंदर बांधे हुए रखती है और ऐसे लोग कभी भी उस सीमा को पार नहीं कर पाते हैं और न ही उससे निकल पाते हैं लेकिन सच्चाई यह है कि एक इंसान की सफलता की कोई भी सीमा नहीं होती है, एक इंसान जितना चाहे उतना जीवन में सफलता को प्राप्त कर सकता है और आगे बढ़ सकता है।
एक इंसान की जितनी बड़ी सोच होती है वह उतने ही बड़े अद्वितीय कार्य सम्पन्न कर सकता है। ऐसे व्यक्ति के लिए इस अखिल विश्व में कुछ भी असंभव नहीं हो सकता है।
लेखिका – सुषमा श्रीवास्तव, मौलिक विचार, सर्वाधिकार सुरक्षित, रुद्रपुर, उत्तराखंड।
