मिट्टी से जिसका जीवन भर का नाता है
वहीं ही माता का लाल सच्चा अन्नदाता कहलाता है
 आलस ना देह में,
जो परिश्रम से ना घबराता है
माटी को चीर कर,
निरंतर कर्म कर अनाज उपजाता है
 मिट्टी से जिसका जीवन भर…….
ओले, सूखे,बारिश में भी,
जिसे अपना खेत ही सुहाता है
मिट्टी के कण-कण में जिसका पसीना,
फ़सल बन लहलहाता है
मिट्टी से जिसका जीवन भर……..
छोटा बड़ा जैसा भी हो खेत,
संतान-सा पालन पोषण वो किसान से पाता है
किसान रुपी पिता की छाँव में, अनाज से परिपूर्ण हो औरों के काम वो आता है
 मिट्टी से जिसका जीवन भर ……..
है महान, वो जो छोटे-छोटे बीजों से भी,
पूरे देश का पेट भर जाता है
स्वयं की परवाह ना किए,
इस माटी को अपने जीवन के अमूल्य समय दे जाता है
मिट्टी से जिसका जीवन भर……..
कड़ी धूप हो या शीतल छाँव,
जो एक क्षण के लिए भी माटी से दूर नहीं हो पाता है
कैसे आभार व्यक्त करें उस महान आत्मा का,
जो मिट्टी से जुड़कर भी उचित सम्मान नहीं पाता है
 मिट्टी से जिसका जीवन भर…….
ना सम्मान चाहता,न धन,
केवल मिट्टी से जुड़कर ही अपनी अस्मिता देखता है
जो मिट्टी में रहकर ही,
माता का स्नेहिल स्पर्श को गौरव समझ,
सम्पूर्ण जीवन अपनी मिट्टी को दे जाता है 
मिट्टी से जिसका जीवन भर………
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