अन्नदाता…. आखिर कौन है अन्नदाता….
समाज का आधा
र होता है अन्नदाता…
किसान से ही तो जीवन हमारा
किसान नहीं तो जीवन अकाल का मारा,
तपती धूप, कड़कती ठण्ड या हो बरसात कितनी ही
उसे फ़िक्र नहीं अपनी,
फ़िक्र तो बस फसल की
थम ना जाओ कहीं तुम
कभी कोई अवकाश की आस नहीं,
मेहनत और लगन को ही अपना कर्म माना,
आसान नहीं होता हल चलाना
हो कैसी भी परिस्थिति,
रुकना थमना नहीं सीखा उसने
 किसान नहीं तो क्या जीवन हो
हर तरफ बस हाहाकार हो,
युग बदलेंगे, बदलेंगी सदिया
अन्नदाता तेरा कर्ज न उतार पाउँ मैं,
खज़ाना दिया अनमोल अन्नरूपी
उसका मोल कभी ना चुका पाऊं मैं,
हे पोषक पालनहार ये कर्ज कैसे चुकाऊं मैं…
निकेता पाहुजा
रुद्रपुर, उत्तराखंड
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