कितना दर्द छिपा है तेरी मुस्कुराहट के पीछे
कितने जख्म हैं तेरे नाज़ुक हृदय के अंदर 
इतना धैर्य है तेरी शख्सियत में क्यों 
स्त्री तू सहनशीलता की पर्यायवाची है क्या?
रिनी ऋद्धि की डायरी पढ़ती है तो उसके आंसू नहीं रुकते , वो सोचने लगती है कि सचमुच कितना सहन किया मेरी भाभी ने , और कभी मुझे थोड़ा सा भी अपने दर्द का अहसास नहीं होने दिया। चुपचाप अकेले ही सब कुछ सहती रही, और अपने होंठो पर झूठी मुस्कुराहट की लिपिस्टिक लगाए रखी। अपने बालों के जूडे के अंदर अपने सिर दर्द को छिपाए रखा, भैया के दिए हुए जख्मों को अपने कॉलर वाले ब्लाउज के अंदर पीठ पर छिपा के रखा , गालों पर पड़े तमाचों के निशान को गहरे मेकअप से छिपाया आंखों की उदासी को काजल से छिपाया, सब कुछ छिपाती ही तो चली आई हैं वो , मैं भी कितनी नासमझ थी कभी उन्हें ठीक से समझ ही नहीं पाई ।
रिनी रो रही थी और ऋद्धि भाभी की डायरी पढ़ रही थी भाभी कविता लिखती थी और उन्हीं कविताओं में अपने जीवन का दर्द उड़ेल देती थी। उनकी एक कविता सब कुछ बयां कर रही थी
क्यों तुम मेरे होकर भी मेरे नहीं हो तुम
क्यों तुम करीबी होकर भी अजनबी हो तुम
क्यों  गाल शर्म से नहीं तुम्हारे तमाचे से लाल होते हैं
क्यों मेरी आंखों से काजल नहीं आंसू बहते हैं 
मेरे बाल सहलाने की जगह जकड़ लेते हो मुट्ठी में
सीने से लगाने की जगह दीवाल से लड़ा देते हो मुझे
मेरे कलाई में चूड़ी की खनक  सुनाई देने की जगह  दिखाई देते हैं तुम्हारी  सिगरेट से जलने के निशान 
क्यों मेरे वजूद को शक की नज़र से देखते हो तुम
क्यों मेरे दिल में बसी हुई अपनी तस्वीर नहीं देखते
क्यों मेरे आत्मसम्मान को  छलनी करते हो तुम
क्यों मुझे समाज में सिर उठाकर चलने  नहीं देते
क्यों मेरी मांग में लगे सिंदूर पर विश्वास नहीं तुम्हें
क्यों अपने पुरुषत्व का घमंड दिखाते हो तुम
क्यों? क्यों? क्यों?
रिनी शर्मिंदा हो रही थी कि उसके भैया जो इतने सीधे साधे दिखते हैं इतने क्रूर और शक्की भी हो सकते हैं , वो भैया जो उसकी एक फरमाइश पूरी करने के लिए पूरा बाजार छान मारते हैं वो भैया जो उसकी आंखों में  एक भी आंसू बर्दाश्त नहीं कर सकते, उसकी जरा सी छींक भी उन्हें रात भर सोने नहीं देती। वो भैया किसी की आंसू की वजह भी बन सकते हैं वो भी किसी और के नहीं अपनी पत्नी के ,वो पत्नी जो उनके लिए पूरी तरह समर्पित है, उसके ऊपर वो शक करते हैं । क्या करूं मैं जिससे भाभी की पहले वाली मुस्कान वापस आ सके वो फिर से हंसने लगे,।
ऋद्धि के जागने से पहले रिनी ने डायरी उसी जगह रख दी  वो नहीं चाहती थी कि उसकी भाभी उसके सामने शर्मिंदा हो, क्योंकि कोई भी औरत अपने आत्म सम्मान को खोना पसंद नहीं करती। रिनी के सामने ऋद्धि हमेशा हंसती मुस्कुराती, घर को अच्छे से संभालती हुई नजर आती थी, और भैया के साथ भी भाभी  अपना रिश्ता रिनी के सामने अच्छा रखने का प्रयास करती थी,।
ऋद्धि की नींद खुल गई थी रिनी को अपने पास बैठे हुए देखकर वो उठकर बैठ गई, रिनी ने उन्हें उठने से मना किया और कहा
“भाभी, आप अब चुपचाप आराम करेंगी, आपकी तबियत ठीक नहीं है, डॉक्टर अंकल ने आपको आराम करने के लिए कहा है , जब तक आपकी तबियत ठीक नहीं हो जाती तब तक घर की और आपकी पूरी जिम्मेदारी मेरी।
अब आप बिस्तर से नीचे नहीं उतरेंगी,जब तक आपका बुखार उतर नहीं जाता। आपको मेरी कसम ।”
“ये क्या गुड़िया, तुमने अपनी कसम क्यों दे दी, गलत बात है ना,तुम अभी बच्ची हो घर की पूरी जिम्मेदारी कैसे संभालोगी? तुम्हें कॉलेज भी जाना होता है,तुम्हारे भैया को ऑफिस जाना होता है, कैसे करोगी तुम सब कुछ?”
ऋद्धि ने रिनी को प्यार भरे गुस्से से देखा।
“मेरी प्यारी भाभी मां, बस कुछ ही दिनों की बात है ना, मुझे करने दीजिए, आखिर एक दिन मुझे भी तो ससुराल जाना है ना,बस केवल पंद्रह दिन तक मैं काम करूंगी, सोलहवें दिन आपको आपका घर सही सलामत वापस कर दूंगी कोई गलती नहीं करूंगी मैं,आप देख लीजिएगा।
तब तक आप अपना मोबाइल चलाइए, अपनी सहेलियों से बात कीजिए , जो दिल करे वो करिए, अपने आपको समय दीजिए”। रिनी अपनी भाभी के गले में बाहें डाल कर लाड़ से बोली।
ऋद्धि के पास अब रिनी की बात मानने के अलावा कोई चारा नहीं था, उसने हारकर रिनी को इजाजत दे दी , शाम को अच्युत ने जब रिनी को खाना बनाते हुए देखा तो वो बहुत गुस्सा हुआ लेकिन रिनी ने उसे भी अपनी कसम देकर मना लिया। बेमन से ही सही अच्युत को मानना पड़ा, उसने ऋद्धि को पंद्रह दिन आराम करने की छूट तो दे दी लेकिन इस शर्त पर कि वो कमरे की खिड़की नहीं खोलेगी , परदे लगाकर रखेगी। बालकनी में नही जायेगी। सिर्फ कमरे में रहेगी। ऋद्धि को अच्युत की सोच से दुख तो हुआ लेकिन वो अब आदी हो चुकी थी। इसलिए उसने चुपचाप अच्युत की बात मान ली।
रिनी ने पूरे घर का काम संभाल लिया , ऋद्धि को वह कुछ नहीं करने देती थी, घर का काम ख़तम करने के बाद वो कॉलेज जाती ।
ऋद्धि अपने कमरे में बैठी अपनी डायरी लिखती, पेंटिंग करती, कढ़ाई करती, सहेलियों से चैट करती।एक दिन वो व्हाट्सएप पर अपनी फ्रेंड्स को गुड मॉर्निंग मैसेज भेज रही थी तभी उसके पास अनजान नंबर से एक मैसेज आया 
“गुड मॉर्निंग, हैव ए नाइस डे “
ऋद्धि हैरान रह गई, उसके पास किसने मैसेज भेज दिया इस नंबर को तो वो जानती भी नहीं थी, उसने उस मैसेज का  कोई रिप्लाई नहीं दिया। डेली उसके मोबाइल पर उसी नंबर से गुड मॉर्निंग विशेज की इमेज आती , लेकिन ऋद्धि कोई रिप्लाई नहीं करती,। इस बात को एक हफ्ता बीत गया। हां ये जरूर था कि गुड मॉर्निंग मैसेज के अलावा और कोई मैसेज नहीं आता। एक दिन ऋद्धि ने अपनी बेस्ट फ्रेंड नित्या को ये बात बताई अच्युत को बताने की हिम्मत वो नहीं कर सकी क्योंकि उसे पता था क्योंकि उसे पता था कि अच्युत उस पर ही शक करेंगे , और फिर से उस पर जुल्म करना शुरू कर देंगे।
नित्या ने ऋद्धि से कहा कि वो उसके मैसेज का जवाब दे दे, ये तो पता चले कि वो है कौन ?
ऋद्धि क्या करेगी ? आइए जानते हैं अगले भाग में तब तक पढ़ते रहिए आप” अनदेखा मीत”
संगीता शर्मा” प्रिया”
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