अगर शब्दों के पंख होते तो 
आसमाँ में लिखती रोज 
एक नयी सी कहानी,  
अगर शब्दों के पंख होते तो 
हवा में चमकते, तैरते होते 
मेरे अलहदा से जज़्बात,
अगर शब्दों के पंख होते तो 
किसी डायरी के अधूरे पन्नों में
यूँ ना दम तोड़ते मेरे एहसास,
अगर शब्दों के पंख होते तो 
शायद पहुँच ही जाते उड़कर 
और दस्तक देते तुम्हारे दिल पर, 
हाँ शायद,..शायद !!
✍️शालिनी गुप्ता प्रेमकमल🌸
(स्वरचित सर्वाधिकार सुरक्षित)
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