परमपिता परमेश्वर में लीन हो गई ,
स्वर कोकिला परमात्मा में विलीन हो गई |
पचास वर्षों तक एकछत्र किया राज ,
पदम् भूषण का पहनाया गया ताज |
स्वर सम्राज्ञी उतरी थी वो धरा पर ,
सादगी की थी मिसाल वसुधा पर |
विदेशों में भी उनकी बनी पहचान थी ,
अनमोल हीरा, देश का वो मान थी |
सिनेमा जगत को नया आयाम दिलाया,
शारदे माँ की अनुकंपा से ऐसा स्वर पाया |
लता जी की वाणी का जादू ऐसा छाता था,
हर कोई आवाज का दीवाना बन जाता था |
लता दीदी जैसी कृतियाँ अमर रहती सदा,
साहित्य, सुर-ताल से मिलन की रखती अदा |
संगीत की झंकार रूह मे उनके बसती ,
अलौकिक छटा से महफ़िल थी सजती |
अपूर्णीय क्षति हिंदुस्तान को हो गई ,
स्वर की देवी, नगमों की मल्लिका खो गई |
तिरंगा भी शान में तुम्हारी तो हैं झुका ,
धड़कनों से देश नमन आपको करेगा सदा,
नाज़ भारत को आप पर बना रहेगा सदा |
तुमको खोकर सारा जग हो गया बैचेन ,
अश्रुपूरित आज हो गए यहां सब के नैन |
श्रद्धासुमन आपको अर्पित शिखा करती आज ,
तुम ही तो थी लता दीदी सुरों की सरताज |
अंतिम विदाई आज आपकी कर दी सबने ,
यह कैसी घड़ी दिखाई हमें हमारे रब ने ||
शिखा अरोरा (दिल्ली)
