चल मन अंतरिक्ष की सैर करने,
इस जहां को भूल उड़ाने भरने,
तारों की छांव, बादलों के गांव,
चांद से जी भर कर बातें करने।
चल मन अंतरिक्ष की सैर करने।
जहां झूठ-सच का खेल ना हो,
सिसकती ख्वाहिशों का जेल ना हो,
खुले आकाश में, चांदनी के प्रकाश में,
अपनी चाहतों के कुछ रंग भरने।
चल मन अंतरिक्ष की सैर करने।
स्वरचित रचना
रंजना लता
समस्तीपुर, बिहार
